अकबर के नौ रत्नों के नाम (1) बीरबल - बीरबल का वास्तविक नाम महेशदास था इनको अकबर ने कविराज की उपाधि भी दी हुई थी। - बीरबल अकबर शासनकाल में...
अकबर के नौ रत्नों के नाम
(1) बीरबल
- बीरबल का वास्तविक नाम महेशदास था इनको अकबर ने कविराज की उपाधि भी दी हुई थी।
- बीरबल अकबर शासनकाल में उनके द्वारा शुरू किये गए धर्म दीन-ए-इलाही धर्म के सदस्य भी थे।
- बीरबल की मृत्यु युसुफजाई कबीले वालो से युद्ध करते समय हुई थी।
(2) तानसेन
- तानसेन का वास्तविक नाम रामतनु पाण्ड्य था और इनके गुरु का नाम हरिदास था।
- तानसेन ग्वालियर के रीवा राज्य के राजा रामचनद्र के दरबार में रहते थे।
- तानसेन को कंठाभरणवासी की उपाधि मिली हुई थी।
- इनकी रमुख कृतियो में मियातोड़ी, मिया की मल्हार, मिया की सारंग, दरबारी कान्हा आदि थी।
(3) अब्दुर्रहीम खानेखाना
- रहीम अकबर के प्रधानमंत्री बैरम खान का पुत्र था।
- इनको अकबर ने गुजरात के विजय अभियान के बाद खानखाना की उपाधि दी थी।
- ये एक कवि और साहित्यकार दोनों थे।
(4) अबुल फज़ल
- अबुलफज़ल एक इतिहासकार और दर्शन- साहित्य के अचे विद्वान थे।
- अबुलफज़ल ने अकबरनामा और आईनेअकबरी की रचना की थी।
- 1602 ई. में वीरसिंह बुंदेला के द्वारा सलीम (जहाँगीर) के कहने पर उनकी हत्या कर दी गई थी।
(5) फैजी
- फ़ैज़ी अबुल फज़ल का भाई और अकबर के दरबार का राजकवि था।
- फैजी के द्वारा कई ग्रंथो का हिंदी में अनुवाद किया गया था।
(6) मानसिंह
- मानसिंह राजा भारमल का पौत्र और भगवानदास का पुत्र था।
- मानसिंह एक साहसी सेनापति था।
(7) टोडरमल
- टोडरमल शेरशाह के काल के दौरान उनके दरबार में भी रहते थे उनको शेरशाह के दरबार से अनुभव प्राप्त था।
- टोडरमल ने दहशाला बंदोबस्त (भूमि सुधार) की व्यवस्था को अकबर के समक्ष रखा था।
(8) मुल्ला दो प्याजा
- मुल्ला दो प्याजा बहुत ही बुद्धिमान इंसान थे ये हाजिर जवाबी इंसान थे।
(9) हकीम हुमायु
- ये मुगलकाल के रसोईघर के प्रबंधक थे।
अकबर के प्रशासन की विशेषताएं
- अकबर ऐसा शासक था जिसने हिन्दू मुस्लिम सभी धर्मो का सम्मान किया था।
- हिन्दू लोगो पर अन्य शासको की तरह कोई नाइंसाफी नहीं की थी।
- अकबर ने भूमि से सम्बंधित अन्य कई प्रकार की व्यवस्थाएं की थी।
- हिन्दू करो को माफ़ किया था।
- मनसबदारी प्रथा की शुरुआत भी की थी।
- अकबर ने करो को देने के नगद से अलग अन्य कई तरह के विकल्प दिए थे।
- सेना को नगद वेतन दिया जाता था और भू-राजस्व में छूट भी प्रदान की थी।
- दास प्रथा को समाप्त कर दिया था और बहु विवाह पर भी रोक लगाई थी।
- विधवा विवाह को प्रोत्साहन दिया था।
अकबर के सैन्य अभियान
राजस्थान / राजपूत
(1) आमेर /जयपुर
- आमेर के राजा भारमल ने 1562 ई. में अधीनता स्वीकार करके हरका बाई का विवाह अकबर से किया था।
(2) मेवाड़
- अकबर ने चित्तोड़ के राजा उदयसिंह पर 1567 ई. में आक्रमण किया था
- 1572 ई. में राणा प्रताप चित्तोड़ के राजा बने इसके बाद 1576 ई. में अकबर और महाराणा प्रताप के मध्य हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था।
- इस युद्ध में अकबर की तरफ से सेनापति मानसिंह और आसफ खान थे जबकि महाराणा की तरफ से सेनापति खुद राणा और हकीमखां थे।
- हल्दी घाटी के युद्ध में मुगलो की जीत होती है परन्तु कुछ समय बाद ही राणा अपने साम्राज्य पर पुनः अधिकार कर लेते है।
- महारणा प्रताप की मृत्यु 1597 ई. में होती है जिसके बाद उनका पुत्र अमरसिंह चित्तोड़ का राजा बनता है।
- राणा की मृत्यु के बाद मेड़ता, रणभम्भौर, कालिंजर, मारवाड़ मुग़ल सत्ता के आधीन हो जाते है।
(3) गुजरात
- गुजरात पर मुजफ्फर खां का शासन था तब 1572 ई. में अकबर गुजरात पर अकमण करता है और सूरत को अपने कब्जे में करता है।
- 1573 ई. में गुजरात में विद्रोह होता है जिसको अकबर दबा देता है।
(4) बिहार बंगाल
- बिहार बंगाल में दाऊद खां का शासन था 1574 ई -1576 ई. के मध्य अकबर और मुनीमखाँ ने बिहार पर आक्रमण किया था।
- काबुल, कश्मीर, सिंध, उड़ीसा, बलूचिस्तान, कंधार आदि जगहों पर भी मुगलो का शासन था।
(5) दक्षिण भारत
- दक्षिण भारत में खानदेश, दौलताबाद, अहमदनगर और असीरगढ़ आदि पर अकबर का शासन था।
- अहमदनगर पर आक्रमण के समय अहमदनगर का नेतृत्व चाँदबीबी ने किया था।
- असीरगढ़ पर अकबर का अंतिम आक्रमण था जो 1601 ई. में किया गया था।
अकबर की मृत्यु
- अकबर की मृत्यु ऑक्टूबर 1605 ई. में हुई थी और उसको आगरा के सिंदराबाद में दफनाया गया था।
- अकबर एक अनपढ़ शासक था उसको नगाड़ा बजाना पसंद था।
- अकबर के बाद उसका पुत्र जहाँगीर (सलीम) मुग़ल साम्राज्य का अगला शासक बना था।
अकबर का इतिहास / akbar ka itihaas
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