परिचय - शाहजहाँ का जन्म 5 जनवरी 1592 ई . को हुआ था उसके पिता का नाम जहाँगीर और माता का नाम जगतगोसाई था। - शाहजहाँ के बचपन का असली नाम ...
परिचय
- शाहजहाँ का जन्म 5 जनवरी 1592 ई. को हुआ था उसके पिता का नाम जहाँगीर और माता का नाम जगतगोसाई था।
- शाहजहाँ के बचपन का असली नाम खुर्रम था उसको शाहजहाँ की उपाधि उसके पिता जहाँगीर के द्वारा दी गई थी।
- उसका राज्यभिषेक 4 फरवरी 1628 ई को हुआ था इसी दिन मुग़लसाम्राज्य की सत्ता शाहजहाँ के हाथो में दी गई थी।
- शाहजहाँ का शासनकाल (1627 ई.-1657 ई.) के मध्य तक रहा था।
- शाहजहाँ का विवाह 1612 ई. में अरजुबन्द बानो से हुआ था जो आसफखान की पुत्री थी।
- दूसरा विवहा मुमताज महल से हुआ था उनकी मृत्यु 1631 ई. में बहुत कम आयु में हो गई थी।
- मुमताज महल से शाहजहाँ को सात बच्चे थे जो जीवित भी रहे थे।
(1) दाराशिकोह (पुत्र) (5) जहाँआरा (पुत्री)
(2) औरंगजेब (पुत्र) (6) रोशनआरा (पुत्री)
(3) मुराद बक्श (पुत्र) (8) गौहनारा (पुत्री)
(4) शाहशुजा (पुत्र)
दारा शिकोह के बारे में
- दारा का झुकाव हिन्दू धर्म के प्रति ज्यादा था
- उसने हिन्दू धर्म के सभी ग्रंथो का अध्यन भी किया था।
- औरंगजेब ने उसकी हत्या इस्लाम का शत्रु बताकर की थी।
- दारा ने शीरे अकबर के नाम से फ़ारसी भाषा में 52 उपनिषदों का अनुवाद किया था।
- शाहजाहाँ ने दारा शिकोह को शाह बुलंद इकबाल की उपाधि प्रदान की थी।
शाहजहाँ का प्रारंभिक जीवन
- शाहजहाँ ने बादशाह बनने से पहले मेवाड़, अहमदनगर पर जीत हासिल की थी।
- शाहजहाँ ने 1623 ई. में अपने पिता जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह किया परन्तु बाद में माफ़ी मांग ली थी।
- जहाँगीर की मृत्यु के बाद पहले खुसरो के पुत्र दाबर को बादशाह घोषित किया गया जो चार महीने तक रहा था।
- बाद में जहाँगीर का पुत्र शहरयार को बादशाह बनाया गया क्योकि वहा कोई मौजूद नहीं था।
- इस फैसले से शाहजहाँ ने आसफ खान को कहकर लाहौर में सभी राजकुमारों और उत्तराधिकारी की हत्या करवा दी थी।
- शाहजहाँ का राज्यभिषेक आगरा में हुआ था।
- आसफखां शाहजहाँ का ससुर और इत्माद-उद-दौला का पुत्र और मेहरुनिशा का पुत्र था।
- आसफखां को 7000 जात और सवार के साथ वजीर के पद पर नियुक्त किया था।
शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान विद्रोह
- वीरसिंह बुंदेला (जहाँगीर का सारथी जिसने अबुल फजल की हत्या की थी) के पुत्र शासक झुजर सिंह ने बुंदेलखंड का विद्रोह किया था जो (1628 ई.-1635 ई.) तक रहा था।
- दक्षिण भारत में खानजहाँ लोदी ने (1628 ई-1631 ई.) के मध्य में विद्रोह किया था उसकी हत्या अफगान सरदार ने 1631 ई. में कर दी थी।
- पुर्तगालियों ने भी 1632 ई. में हुगली पर अधिकार कर विद्रोह किया था।
- सिक्खो के गुरु हरगोविंद द्वारा हिट पुट संघर्ष निरंतर चलता रहा था।
शाहजहाँ का साम्राज्य विस्तार
(1) दक्षिण अभियान
- पहली बार शाहजहाँ ने अहमदनगर पर (1629 ई.-1636 ई.) में विजय प्राप्त की थी।
- 1636 ई. में गोलकुंडा पर विजय प्राप्त की थी जिसमे मुगलो ने संधि कर ली थी।
- इसी वर्ष बीजापुर बहमनी साम्राज्य पर भी मुगलो द्वारा सन्धि की गई थी।
Note - शाहजहाँ का पुत्र औरंगजेब पहले (1636 ई.-1644 ई.) और बाद में (1652 ई.-1658 ई.) तक दक्कन के सूबेदार पद पर था।
Note - नीर जुमला जो कि गोलकुंडा का वजीर था (मोहम्मद सईद) ने शाहजहाँ को कोहिनूर का हीरा उपहार में दिया था जो उसने अपने सिंहासन में जड़वाया था।
(2) कन्धार (उत्तर पच्छिम)
- कन्धार के लिए मुगलो और ईरान (फारस) के लिए हमेशा संघर्ष रहता था।
- 1622 ई. में कन्धार को फारस ने जीता था जबकि 1628 ई. में फिर से मुगलो के अधीन हो गया था।
- 1848 ई. में दोबारा कन्धार को फारस ने जीत लिया था।
महत्वपूर्ण बिंदु
- मुगलो के शासनकाल में शाहजहाँ के काल को स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता था।
- उस समय में दिल्ली का लालकिला, दीवाने आम, दीवाने खास, जामा मस्जिद, ताजमहल, आगरा के किले में मोती मस्जिद, दिल्ली में मोती मस्जिद।
- उस्ताद ईशा और अहमद लाहौरी उस काल के मुख्य कलाकार थे।
- ताजमहल का निर्माण शाहजहाँ द्वारा करवाया गया था जो कि भारतीय, ईरानी और मध्य एशिया की कला का मिक्षण था।
- शाहजहाँ ने आगरा से बदलकर 1638 ई. में अपनी राजधानी शाहजहांनाबाद ( शहर की स्थापना)को बनाया था।
- शाहजहाँ ने मयूर सिंघासन का निर्माण कराया था इसके कलाकार बादलखान थे।
- उस समय के प्रमुख संगीतज्ञ लालखां थे।
- उसके प्रमुख चित्रकार मोहम्मदफ़कीर और मीरहासिम था।
- अकबर के काल से चली आ रही सिजदा और पाबोस की प्रथा को बंद करवाया था।
- कवीन्द्राचार्य के कहने पर शाहजहाँ ने बनारस और इलाहबाद की यात्रा के लिए कर को बंद करवा दिया था।
- उसने विवाह के लिए नए नियम बनाये थे जाति से अलग विवाह पर रोक लगा दी गई थी
उत्तराधिकार के लिए युद्ध
(1) बहादुरपुर का युद्ध (1658 ई.) - दाराशिकोह ने अपने भाई शुजा को इस युद्ध में पराजित किया था।
(2) धरमट का युद्ध (1658 ई.) - यह युद्ध 15 अप्रैल को हुआ था जिसमे दाराशिकोह को औरंगजेब को पराजित किया था।
(3) सानुगढ़ का युद्ध (1658 ई.) - यह युद्ध 29 मई को हुआ था इसमें दारा ने औरंगजेब को हराया था।
(4) दवराई का युद्ध (1659 ई.) - इस युद्ध में दाराशिकोह को औरंगजेब ने हरा दिया था इस युद्ध के बाद दाराशिकोह की अगस्त में हत्या करवा दी गई थी।
शाहजहाँ की मृत्यु
- औरंगजेब ने शाहजहाँ को (1658 ई.-1666 ई.) तक आगरा में कैद रखा था वही उसकी मृत्यु भी हो गई थी।
- शाहजहाँ की मृत्यु के बाद उसका पुत्र औरंगजेब ही मुग़ल साम्राज्य का अगला राजा घोषित किया गया था।
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