NCERT ECONOMICS CLASS 9TH CHAPTER- 2 संसाधन के रूप मे लोग

अपने पिछले ब्लॉग में हमने NCERT ECONOMICS CLASS 9TH CHAPTER - 1 पालमपुर गांव की कहानी का अध्ययन किया था।  सम्पूर्ण अर्थशास्त्र की कक्षा 9th ...

संसाधन के रूप मे लोग

अपने पिछले ब्लॉग में हमने NCERT ECONOMICS CLASS 9TH CHAPTER - 1 पालमपुर गांव की कहानी का अध्ययन किया था। 

सम्पूर्ण अर्थशास्त्र की कक्षा 9th की पुस्तक का सार  

मानव संसाधन 

- लोग ही एक राष्ट्र के सबसे संसाधन होते है।  मानव संसाधन अंतिम रूप होता है। 

- स्वस्थ और शिक्षित लोग अपनी अवश्यकता के अनुसार संसाधन का विकास करते है। 

- मानव संसाधन सजीव और क्रियाशील करक होता है। 


मानव पूँजी 

- मानव के जो भी होता है वह मानव पूँजी कहलाता है जैसे श्रम इत्यादि। 

- मानव मे ज्ञान होना भी मानव पूंजी होता है मतलब भौतिक पूंजी पर लगने वाली मेहनत भी मानव पूंजी है। 


मानव पूँजी निर्माण 

जब मानव संसाधन को मानव द्वारा और ज्यादा बेहतर बनाया जाये वह मानव पूँजी निर्माण कहलाता है। 


अर्थवयवस्था प्रमुख के क्षेत्रक

(1) प्राथमिक क्षेत्रक-  इस क्षेत्रक मे कार्य भूमि और जल से सम्बन्धित होते है जैसे - पशुपालन , कृषि , मतस्य पालन , दूध व्यापार 

(2) द्वितीयक क्षेत्रक- इस क्षेत्रक मे कार्य विनिर्माण से जुड़े होते है जैसे - बिस्कुट की फैक्ट्री मे बिस्कुट बनाना। 

(3) तृतीयक क्षेत्रक- सेवाओं से जुड़े कार्य तृतीयक क्षेत्रक से जुड़े होते है जैसे - डॉक्टर, बैंक, कोई अध्यापक जो छात्र को पढ़ा कर सेवा देता है। 


दायित्व - किसी के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाना दायित्व कहलाता है। 


संपत्ति - मेरे पास नौकरी , पैसा , शिक्षा सब संपत्ति कहलाता है , उसी प्रकार सरकार की सम्पत्ति जनसंख्या होती है जो शिक्षित और स्वस्थ्य हो। 


आर्थिक क्रिया - जो क्रिया हम अपने वेतन और अपने घर की स्थिति के लिए करते है वो आर्थिक क्रिया है। 

- शिक्षा और स्वस्थ्य जितना आम मनुष्य के लिए जरूरी है उतना ही सरकार के लिए आवश्यक है क्यकि शिक्षित मनुष्य ही सरकार को राष्ट्रीय आय प्रदान करता है। 


बेरोजगारी 

जब कोई व्यक्ति कार्य करने का इच्छुक हो और उसके पास कोई कार्य नहीं हो करने के लिए तो वह व्यक्ति बेरोजगार माना जाता है। 

- हमारे देश मे रोजगार करने की निर्धारित उम्र 15 से 64 वर्ष मानी जाती है। 

- 15  वर्ष से कम आयु के बच्चे और 64 से ऊपर के बुजुर्ग सरकार पर दायित्व होते है। 


बेरोजगारी के प्रकार - बेरोजगारी तीन प्रकार की होती है 

(1) मौसमी बेरोजगारी -  यह बेरोजगारी मौसम के अनुसार आती है , ज्यादातर इसको गांव मे देखा जा सकता है जब फसल आती है मजदूरों को कार्य मिल जाता है बाकि समय वो बेरोजगार होते है। 

(2) प्रच्छन बेरोजगारी - प्रच्छन बेरोजगारी वो होती है जब  किसी कार्य के लिए 5 लोगो की जरुरत हो परन्तु रखे 8 व्यक्ति रखे जाते है और वेतन भी कम दिया जाता है। 

(3) शहरी  बेरोजगारी - जब अच्छा शिक्षित व्यक्ति भी बेरोजगार हो तो वह शहरी बेरोजगारी होती है। 


भारत मे बेरोजगारी के प्रमुख कारण 

(1) बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी का प्रमुख कारण है यदि किसी क्षेत्र मे जॉब के लिए 100  पद निकले है परन्तु ऍप्लिकेशन्स 1000  है तो 900 फिर भी बेरोजगार रह जाते है। 

(2) दूसरा मुख्य कारण कृषि क्षेत्र मे धीमी गति है। 

(3) हमारे देश मे औद्योगिक और सेवा क्षेत्रक सीमित है। 

(4) तकनीकी विकास भी बहुत धीमी गति से हो रहा है। 


NCERT ECONOMICS CLASS 9TH CHAPTER- 3  निर्धनता एक चुनौती 


Thanks....