आपका हमारी पोस्ट पर आने के लिए दिल से धन्यवाद् आज की अपनी पोस्ट में हम राजपूत वंश का विस्तार से अध्यन करेंगे। .. प्रमुख राजपूत वंश (1) गुर्...
आपका हमारी पोस्ट पर आने के लिए दिल से धन्यवाद् आज की अपनी पोस्ट में हम राजपूत वंश का विस्तार से अध्यन करेंगे। ..
प्रमुख राजपूत वंश
(1) गुर्जर प्रतिहार वंश
प्रमुख शासक - (1) नागभट्ट प्रथम (2) वत्सराज (3) नागभट्ट द्वितीय (4) मिहिर भोज प्रथम
(5) महेंद्रपाल (6) महिपाल (7) भोज द्वितीय (8) महेंद्र पाल द्वितीय (9) देवपाल
(10) महिपाल द्वितीय (11) विजयपाल (12) राज्यपाल (13) यशपाल
- प्रतिहार शब्द का मतलब द्वारपाल होता है। इस वंश की उत्पति लक्ष्मण मानी जाती है।
- गुर्जर प्रतिहार वंश का संथापक नागभट्ट था।
- नागभट्ट ने अपनी राजधानी उज्जैन / कन्नौज को बनाया था।
- इस वंश का विस्तार गुजरात और दक्षिण पच्छिम राजस्थान तक था।
- नागभट्ट प्रथम ने अरबो के पहले आक्रमण को असफल किया था इसका उल्लेख ग्वालियर के अभिलेख से मिलता है।
- राजा वत्सराज के समय में कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष शुरू हुआ था , संघर्ष में इसने धर्मपाल को पराजित किया था।
- पहले प्रतिहारो की राजधानी उज्जैन थी नागभट्ट द्वितीय ने अपनी राजधानी कन्नौज को बनाया था।
- मिहिर भोज इस वंश का सबसे प्रमुख और प्रतापी शासक था।
- मिहिर भोज ने आदि बराह की उपाधि धारण की थी।
- इस वंश का अंतिम शासक यशपाल था।
(2) गढ़वाल वंश / राठौर वंश
प्रमुख शासक - मदन चंद्र , गोविन्द चंद्र , जयचंद्र , विजयचन्द्र
- गढ़वाल वंश का संस्थापक चंद्रदेव था।
- गढ़वाल वंश का शासन कन्नौज क्षेत्र में था।
- प्रतिहार वंश के बाद कुछ छोटे-छोटे वंश उभर के आये।
- कन्नौज क्षेत्र में गढ़वाल वंश का उदय हुआ था और इनके शासन का विस्तार वाराणसी तक था।
- गढ़वाल वंश के शासक जयचंद्र की पुत्री सयोगिता के साथ चौहान वंश के प्रमुख शासक पृथ्वीराज चौहान ने स्वयवर से उठाकर शादी की थी ये एक प्रेम विवाह था।
- इस कारण चौहानं वंश और गढ़वाल वंश में शत्रुता थी।
- इस दुश्मनी के कारण ही पृथ्वीराज और मोहम्मद गौरी के तराईन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज चौहान हार जाता है।
- इस युद्ध में अन्य कोई राजपूत वंश पृथ्वीराज का साथ नहीं देते है।
- जबकि गौरी बाद में जयचंद को भी चंदावर के युद्ध में पराजित करता है।
(3) परमार वंश
- परमार वंश के संथापक उपेंद्र राज / कृष्णा राज को माना जाता है।
- कृष्णराज ने अपनी राजधानी धारा नगरी को बनाया था।
- परमार वंश का विस्तार मालवा और धारा नगरी तक था।
- परमार वंश के प्रमुख शासक राजा भोज थे जो कविराज भी थे।
- राजा भोज ने आयुर्वेद पर - आयुर्वेद सर्वस्व , विज्ञानं पर - समरांगन सूत्रधार नमक पुस्तके लिखी थी।
- भोज ने चिकित्सा , गणित , व्याकरण पर भी पुस्तके लिखी थी।
- राजा भोज ने धारा नगरी ( वर्तमान मध्यप्रदेश) में एक संस्कृत विद्यालय और सरस्वती मंदिर का निर्माण कराया था।
- राजा भोज ने भोपाल के नजदीक एक भोजपुर नामक नगर और एक तालाब का निर्माण कराया था।
(4) चालुक्य वंश / सोलंकी वंश
प्रमुख शासक - मूलराज , चामुंडराज , दुर्लभ राज , भीमदेव प्रथम , कर्ण , जयसिंह सिद्धराज , कुमारपाल , अजयपाल , भीमदेव द्वितीय
- चालुक्य वंश के संस्थापक मूलराज प्रथम थे।
- मूलराज प्रथम ने अपनी राजधानी अन्हिलवाड बसाई थी।
- चालुक्य वंश का शासन गुजरात में था।
- भीमदेव प्रथम के शासनकाल में महमूद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर लूटपाट की थी।
- जयसिंह सिद्धराज के दरबार में जैन आचार्य हेमचन्द्र रहते थे।
- भीमदेव द्वितीय के शासनकाल में मोहम्मद गौरी ने गुजरात पर आक्रमण किया था जिसमे गौरी की पराजय हुई थी।
- भीम देव प्रथम के सामंत विमल शाह ने अपने पुत्र होने की ख़ुशी में माउंट आबू पर दिलवाड़ा के जैन मंदिर का निर्माण कराया था।
- इस वंश के प्रमुख शासक जयसिंह सिद्धराज ने माउंट आबू पर अपने पूर्वजो की सात मूर्तियों का निर्माण कराया था।
- जयसिंह सिद्धराज ने मोढेरा के सूर्य मंदिर का भी निर्माण कराया था।
(5 ) चौहान वंश / चहमान
प्रमुख शासक - वासुदेव , अजयदेव चौहान , अर्णोराज , विग्रह राज , पृथ्वीराज तृतीय
- चौहान वंश के संस्थापक वासुदेव थे , इनकी राजधानी अहिछत्र / अजमेर थी।
- चौहान वंश का शासन राजस्थान और दिल्ली में था।
- चौहान वंश के प्रमुख शासक विग्रहराज के राजकवि सोमदेव ने ललित विग्रहराज नाटक की रचना की थी।
- इस वंश के प्रमुख शासक पृथ्वीराज चौहान थे जो इस वंश के अंतिम शासक भी थे।
- पृथ्वीराज की मृत्यु तराईन के द्वितीय युद्ध में हुई थी जो 1192 ई. में मोहम्मद गौरी के साथ हुआ था।जबकि पहले तराईन के युद्ध में इन्होने गौरी को बुरी तरह से पराजित किया था।
(6) चंदेल वंश
प्रमुख शासक - नन्नुक , वाक्पति चंदेल , जयशक्ति चंदेल , राहिल चंदेल , हर्ष चंदेल , यशोवर्मन चंदेल , धंगदेव , विद्याधर , विजयपाल , देववर्मन , कीर्तिसिंह चंदेल ,जयवर्मन , पृथ्वी वर्मन , मदन वर्मन , यशोवर्मन द्वितीय , परमादिदेव।
- चंदेल वंश के संथापक नन्नुक और इनकी राजधानी खजुराहो थी।
- इस वंश का शासन बुन्देलखण्ड के सीमा के क्षेत्रो पर था।
- चंदेल वंश वैष्णव धर्म को ज्यादा मानते थे इन्होने खजुराहो में विष्णु भगवान के मंदिर का निर्माण कराया था।
- चंदेल वंश के राजा धागा ने जल समाधि ली थी।
- इस वंश के शासक परमादिदेव और पृथ्वीराज चौहान का 1182 ई. में युद्ध हुआ था।
- परमादिदेव के सेनापति का नाम उल्ला उदल था।
- राजा विद्याधर के शासन के समय महमूद गजनवी ने आक्रमण किया था जिसके डर के कारण विद्याधर का सेनापति भाग गया था इस घटना से आहत होकर सेनापति की हत्या कर दी थी।
- राजपूत वंशो के दौरान एकता नहीं थी यह मुख्य कारण का मुस्लिमो की सत्ता होना।
- निम्न जाति को समानता प्राप्त नहीं थी।
- सती और जौहर प्रथा को बढ़ावा दिया जाता था।
- कृषि राजपूतो का मुख्य व्यवसाय था।
- व्यापार में कोई विकास देखने को नहीं मिलता है।
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