NCERT HISTORY CLASS 6TH CHAPTER - 9 व्यापारी राजा और तीर्थयात्री

आपका इस ब्लॉग पर आने के धन्यवाद आज के ब्लॉग में हम कक्षा 6th की इतिहास की NCERT की पुस्तक के बारे में पढ़ेंगे। ....... ये मेरे खुद के नोट्स ह...

आपका इस ब्लॉग पर आने के धन्यवाद आज के ब्लॉग में हम कक्षा 6th की इतिहास की NCERT की पुस्तक के बारे में पढ़ेंगे। .......

NCERT HISTORY  CLASS 6TH  CHAPTER - 9 व्यापारी राजा और तीर्थयात्री

ये मेरे खुद के नोट्स है जो मैंने अपनी कॉपी में बनाये हुए है और बाद में टाइप करके अपलोड किये मेरी कोशिश होती है मै अच्छे से लिखु अगर कोई गलती हो तोह आप मुझे बता सकते है। ....

व्यापार और व्यापारी 

- पुराने समय में दक्षिण भारत सोना , मसाले , काली मिर्च , कीमती पथरो के लिए प्रसिद्ध था , रोमन में कालीमिर्च को काला सोना कहा जाता था।

- व्यापारियों  ने भारत आने के लिए कई समुंद्री  रास्ते खोज लिए थे। 

- व्यापारी अफ्रीका या अरब के पूर्वी तट से इस महाद्वीप के  पच्छिमी तट पर पहुंचना चाहते थे तो वे दक्षिणी - पच्छिमी मानसून के साथ चलना पसंद करते थे। 

समुन्द्र तटों से लगे राज्य 

(1) गुजरात   (2) गोवा   (3) महाराष्ट्र   (4) कर्नाटक   (5) केरल   (6) तमिलनाडु  (7) आंध्रप्रदेश 

(8) उड़ीसा   (9) पच्छिम बंगाल 

- इस उपमहाद्वीप के दक्षिणी भाग में बड़ा तटीय प्रदेश है जिसमे बहुत से पहाड़ , पत्थर , नदी और मैदान है। 

- नदियों के मैदानी इलाको में कावेरी का मैदान सबसे उपजाऊ है , कावेरी को दक्षिणी गंगा भी कहा जाता है। 

- संगम कविताओं में मुवेंदार की चर्चा मिलती है जिसका अर्थ है तीन मुखिया।  इसका प्रयोग तीन शासक परिवारों चोल , पांडय , शेर के लिए किया जाता था।  

- इन तीनो मुखियाओं के दो- दो सत्ता केंद्र थे जिसमे चोलो का पत्तन पुहार या कवेरीपटट्नम था और दूसरा मदुरै था। 

- ये मुखिया कर ना लेकर उपहार की मांग करते थे और कभी कभी ये सैनिक अभियान पर भी निकल जाते थे और आस - पास के इलाको से शुल्क वसूलते थे। 

सातवाहन राजवंश 

- चोल , शेर , पांड्य वंश के बाद दक्षिण भारत में सातवाहन वंश का प्रभाव बढ़ गया था। 

- सातवाहनों का प्रमुख राजा गौतमी पुत्र सतकर्णी था जिसका उल्लेख उसकी माँ बालश्री के अभीलेख से प्राप्त होता है। 

- सतकर्णी और सातवाहन के अन्य राजा दक्षिणापथ (दक्षिण की और जाने वाला रास्ता )के स्वामी कहे जाते थे।  

 रेशम मार्ग 

- रेशम के कीड़े से कच्चा रेशम निकालकर सूट कतई होती थी जिस से कपड़ा बना जाता था। 

- रेशम बनाने की तकनीक का पहली बार उपयोग चीन में 7000 साल पहले हुआ था। 

- जिस रास्ते से ये लोग पच्छिमी देशो में रेशमी कपडे ले जाते थे उस मार्ग को रेशम मार्ग कहा जाता था।  

- लगभग 2000 वर्ष पहले रोम के शासको और धनी लोगो ने रेशम कपडा पहनना शुरू किया था। 

- रेशम मार्ग पर सबसे पहले नियंत्रण कुषाणो ने किया था जो विदेशी शासक थे। 

- करीब 2000 साल पहले मध्य - एशिया तथा पछिमोत्तर भारत पर कुषाणो का शासन था। 

- पेशावर और मथुरा और तक्षशिला कुषाणो के शक्तिशाली केंद्र थे। 

- कुषाणो के शासनकाल के दौरान रेशम मार्ग की एक शाखा मध्य एशिया से होकर सिंधु नदी के मुहाने के पतनो तक जाति थी। 

- कुषाणो से सबसे पहले सोने के सिक्के जारी किये जिनका उपयोग रेशम मार्ग से जाने वाले व्यापारी करते थे। 

बौद्ध धर्म का प्रसार 

- कुषाणो का सबसे प्रसिद्ध राजा कनिष्क था जिसने बौद्ध परिषद का गठन किया , जिसमे विद्वान लोग महत्वपर्ण विषयो पर विचार विमर्श करते थे। 

- बुद्ध की जीवनी (बुद्धचरित ) के रचयिता अश्वघोष कनिष्क के समय के थे। 

- बौद्ध विद्वान अब संस्कृत में लिखने लगे थे। 

- कनिष्क के समय ही एक नई बौद्ध शाखा महायान का विकास हुआ था। 

- बुद्ध भगवान की प्रतिमाएं बननी शुरू हो गई थी जो ज्यादातर मथुरा और तक्षशिला में मिलती है। 

- बोधिसत्व ( ज्ञान प्राप्ति के बाद एकांत वास करते हुए ध्यान साधना) अब लोगो की सोच में परिवर्तन हुआ अब लोगो को शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति के लिए सांसारिक परिवेश में रहना ही उचित समझने लगे थे। 

- बौद्ध धर्म का विस्तार चीन , मध्य एशिया , जापान , कोरिया , श्रीलंका , म्यांमार , थाईलैंड , इंडोनेशिया में हुआ। 

- चीनी बौद्ध यात्री जो करीब 1600 पहले का -शिआन भारत आया था लगभग 1400 वर्ष पहले श्वेन - तत्सांग और श्वेन - तत्सांग से  50 वर्ष पहले इत्सिंग भारत आया था। 

- इन सभी बौद्ध यात्रियों ने बौद्ध शिक्षा प्रमुख केंद्र नालंदा से अपनी शिक्षा ग्रहण की थी। 

नालंदा शिक्षा का केंद्र 

- नालंदा विश्व विद्यालय में शिक्षको की योग्यता बहुत अधिक होती थी , यहां बुद्ध के उपदेशो का सख्ती से पालन होता था मठ के नियम भी बहुत सख्त थे। 

- नए लोगो से द्वारपाल पहले प्रश्न पूछता था तभी अंदर जाने की अनुमति दी जाती थी। 

भक्ति की शुरुआत 

भज  -       विभाजित करना या हिस्सेदारी 

भक्ति -     भक्ति के प्रति झुकाव 

भगवत -    जो अपने ऐश्वर्या तथा सुख को भक्तो के साथ बाटता है। 

- भक्ति मार्ग अपनाने लोग आडम्बर के साथ पूजा के बजाय ईश्वर के प्रति लगन और व्यक्तिगत पूजा पर जोर देते थे। 

- करीब 1400 वर्ष पहले शिवभक्त अप्पार (वेल्लाल )द्वारा लिखित एक कविता का अंश है।  

हिन्दू

-  यह शब्द इंडिया की तरह ही सिंध या इंडस से निकला है यह शब्द अरबो और ईरानियों द्वारा उन लोगो के लिए था जो सिंधु नदी के पूर्व में बसे थे।  

- यही शब्द उनके धार्मिक विश्वास और सांस्कृतिक परम्पराओ के लिए भी प्रयुक्त होता था। 

अन्य 

- करीब 2000 वर्ष पहले पच्छिमी एशिया में ईसाई धर्म का उदय हुआ था। 

- ईशा मसीह का जन्म बेथ लेहम (रोमन साम्राज्य) में हुआ था। 

- ईसाई धर्म का प्रमुख ग्रंथ बाइबिल है। 

- ईशा मसीह की मृत्यु के 100 के अंदर ही ईसाई धर्म के प्रचारक भारत में आने लगे थे , वे पच्छिम एशिया से आये थे। 

- केरल के ईसाई को सीरियाई ईसाई कहते है क्योकि ये पच्छिमी एशिया से आये थे।  

रेशम बनने की शुरुआत - 7000 वर्ष पहले 

 रोमन साम्राज्य में रेशम का उपयोग - 2000 वर्ष पहले 

Thanks .......